Explained How Did Diwali Crackers Came To India Bbc News Telugu....!

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Channel Title : BBC News Telugu

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Published Date : 2018-11-07T08:50:21.000Z

భారత్‌లోకి టపాసులు ఎలా వచ్చాయో తెలుసా?
    

Channel Title : BBC News Telugu

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Published Date : 2018-09-30T05:48:54.000Z

రఫేల్‌ డీల్ ఏమిటి? ఎందుకు వివాదమైంది?
    

Channel Title : BBC News Telugu

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Published Date : 2018-11-07T09:03:06.000Z

పల్లెలోనైనా... పట్టణాల్లోనైనా దీపావళి వేళ వివిధ రకాల బాణసంచా కాల్చడం ఆనవాయితీనే. అయితే... ఈ మిరుమిట్లు గొల్పే రంగురంగుల కాంతులకు అసలు కారణం... ఓ సాధారణ రసాయన శాస్త్ర ప్రక్రియ ప్లస్ కాస్తంత కామన్ సెన్స్... అంతే. అదేంటో ఈ వీడియోలో మీరే చూడండి..
    

Channel Title : BBC News Hindi

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Published Date : 2018-11-07T00:40:21.000Z

साल 2017 में पंजाब विश्वविद्यालय में इतिहास पढ़ाने वाले राजीव लोचन और मुगलकालीन इतिहास के प्रोफ़ेसर नजफ़ हैदर ने इस बारे में बीबीसी हिंदी से कुछ दिलचस्प किस्से साझा किए थे. प्रोफ़ेसर नजफ़ हैदर ने कहा था, ''मुग़लों के दौर में आतिशबाज़ी और पटाखे ख़ूब इस्तेमाल होते थे, ये तो पता है. लेकिन ये कहना सही नहीं होगा कि भारत में पटाखे मुग़ल ही लेकर आए थे. ये दरअसल उनसे पहले ही आ चुके थे. दारा शिकोह की शादी की पेंटिंग में लोग पटाखे चलाते हुए देखे जा सकते हैं. लेकिन ये मुग़लों से पहले भी थे. फ़िरोज़शाह के ज़माने में भी आतिशबाज़ी ख़ूब हुआ करती थी. गन पाउडर बाद में भारत में आया. लेकिन मुग़लों से पहले पटाखे ज़रूर आ गए थे. इसका बड़ा इस्तेमाल शिकार या हाथियों की लड़ाई के दौरान होता था. पटाखे चलाए जाते थे ताकि उन्हें डराया जा सके. मुग़ल दौर में शादी या दूसरे जश्न में भी पटाखे और आतिशबाज़ी होती थी.'' राजीव लोचन के मुताबिक, ''ईसा पूर्व काल में रचे गए कौटिल्य के अर्थशास्त्र में भी एक ऐसे चूर्ण का विवरण है जो तेज़ी से जलता था, तेज़ लपटें पैदा करता था और अगर इसे एक नलिका में ठूंस दिया जाए तो पटाख़ा बन जाता था. बंगाल के इलाक़े में बारिश के मौसम में बाद कई इलाक़ों में सूखती हुई ज़मीन पर ही लवण की एक परत बन जाती थी. इस लवण को बारीक पीस लेने पर तेज़ी से जलने वाला चूर्ण बन जाता था. अगर इसमें गंधक और कोयले के बुरादे की उचित मात्रा मिला दी जाए तो इसकी ज्वलनशीलता भी बढ़ जाती थी. जहां ज़मीन पर यह लवण नहीं मिलता था, वहां इसे उचित क़िस्म की लकड़ी की राख की धोवन से बनाया जाता था. वैद्य भी इस लवण का इस्तेमाल अनेक बीमारियों के लिए करते थे. लगभग सारे देश में ही यह चूर्ण और इससे बनने वाला बारूद मिल जाता था. पर लगता नहीं कि इसका इस्तेमाल पटाख़े बनाने में होता था. ख़ुशियां मनाने के लिए, उल्लास जताने के लिए घर द्वार पर रौशनी ज़रूर की जाती थी. पर इस रौशनी में भी पटाखों का तो कोई विवरण नहीं मिलता. घी के दिए जलने का उल्लेख ज़रूर है. यह बारूद इतना ज्वलनशील भी नहीं था कि इसका इस्तेमाल दुश्मन को मारने के लिए किया जा सके. उस तरह के बारूद का ज़िक्र तो शायद पहली बार साल 1270 में सीरिया के रसायनशास्त्री हसन अल रम्माह ने अपनी किताब में किया जहां उन्होंने बारूद को गरम पानी से शुद्ध करृके ज़्यादा विस्फोटक बनाने की बात कही. जब 1526 में काबुल के सुल्तान बाबर ने दिल्ली के सुल्तान पर हमला किया तो इतिहासकार कहते हैं कि उसकी बारूदी तोपों की आवाज़ सुनकर भारतीय सैनिकों के छक्के छूट गए. अगर मंदिरों और शहरों में पटाख़़े फोड़ने की परम्परा रही होती तो शायद ये वीर सिपाही तेज़ आवाज़ से इतना न डरते.'' तस्वीरें: गेटी इमेजेस, बीबीसी
    

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Published Date : 2018-10-01T02:37:32.000Z

‘‘మేం ఆర్యులం.. అసలు సిసలైన ఆర్యులం...’’ సింధూ నది ఒడ్డున ఉండే బియామా, దాహ్, హానూ, దార్చిక్ గ్రామాల్లో నివసిస్తున్న బ్రోక్పా సముదాయానికి చెందిన దాదాపు 5,000 మంది ఇదే నమ్ముతారు. బీబీసీ తెలుగును ఫేస్‌బుక్ https://www.bbc.com/telugu ట్విటర్‌ https://twitter.com/bbcnewstelugu ఇన్‌స్టాగ్రామ్‌ https://www.instagram.com/bbcnewstelugu/ ఫాలో అవ్వండి
    

Channel Title : BBC News Telugu

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Published Date : 2018-11-09T05:22:09.000Z

ఇంగ్లండ్‌లోని లస్టర్ నగరంలో దీపావళి వేడుకలు అట్టహాసంగా జరిగాయి. వేలాదిమంది ఒక్కచోట చేరి బాణాసంచా కాల్చుతూ ఆనందంగా గడిపారు. ఆ సంబరాలను మీరూ చూడండి.

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